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ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण और उपचार: 10 संकेत जो बचा सकते हैं जान | Brain Stroke in Hindi

December 16, 2025 | By Dr. Nitin Malik

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण और उपचार: 10 संकेत जो बचा सकते हैं जान | Brain Stroke in Hindi

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी चिकित्सीय लक्षण के मामले में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। आपातकालीन स्थिति में हमारे इमरजेंसी नंबर +91-70550 06662 पर कॉल करें।

ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke in Hindi) एक ऐसी चिकित्सा स्थिति है जिसे दुनिया भर में मौत और विकलांगता का दूसरा सबसे बड़ा कारण माना जाता है। भारत में, विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के मेरठ और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में, बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। यह लेख आपको ब्रेन स्ट्रोक के हर उस पहलू से अवगत कराएगा जिसे जानना आपके और आपके परिवार के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकता है।

ब्रेन स्ट्रोक क्या है? (Brain Stroke Meaning in Hindi)

जब हम brain stroke meaning in hindi की बात करते हैं, तो इसका सीधा अर्थ है "मस्तिष्क का दौरा"। जैसे दिल की नसों में रुकावट आने पर हार्ट अटैक आता है, वैसे ही दिमाग की नसों में समस्या आने पर ब्रेन स्ट्रोक होता है। हमारा मस्तिष्क हमारे शरीर का कंट्रोल सेंटर है। इसे हर सेकंड काम करने के लिए ताजे रक्त की जरूरत होती है। रक्त के माध्यम से ही दिमाग को ऑक्सीजन और ग्लूकोज मिलता है। जब किसी कारण से मस्तिष्क के किसी हिस्से में यह रक्त प्रवाह रुक जाता है, तो वहां की कोशिकाएं (Cells) कुछ ही मिनटों में मरना शुरू कर देती हैं। इसे ही brain stroke kya hota hai के रूप में समझा जाता है।

मेरठ के सर्वश्रेष्ठ न्यूरोसर्जन Dr. Nitin Malik के अनुसार, "स्ट्रोक एक ऐसी स्थिति है जिसमें हर एक सेकंड में मरीज के मस्तिष्क की लाखों कोशिकाएं नष्ट होती हैं। इसलिए, इलाज में होने वाली थोड़ी सी भी देरी मरीज को जीवनभर के लिए बिस्तर पर ला सकती है या उसकी जान ले सकती है।"

ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार (Types of Brain Stroke in Hindi)

इलाज शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि स्ट्रोक किस तरह का है। मुख्य रूप से स्ट्रोक तीन प्रकार के होते हैं:

1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke)

यह दुनिया भर में होने वाले कुल स्ट्रोक के मामलों का लगभग 80-85 प्रतिशत होता है। यह तब होता है जब मस्तिष्क की धमनियों में वसा (fat) या कोलेस्ट्रॉल के जमा होने के कारण खून का थक्का (clot) बन जाता है। इससे रक्त का रास्ता बंद हो जाता है और दिमाग को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाती है।

2. हेमोरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke)

यह तब होता है जब मस्तिष्क के अंदर की कोई रक्त वाहिका कमजोर होकर फट जाती है। इसे आम भाषा में 'ब्रेन हेमरेज' भी कहते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण अनियंत्रित उच्च रक्तचाप (High BP) है। यह इस्केमिक स्ट्रोक से अधिक घातक होता है क्योंकि फैला हुआ खून दिमाग के ऊतकों पर दबाव डालता है।

3. टीआईए - मिनी स्ट्रोक (TIA - Transient Ischemic Attack)

इसे एक 'वार्निंग स्ट्रोक' माना जाता है। इसमें रक्त का प्रवाह बहुत कम समय के लिए रुकता है और लक्षण 24 घंटे के अंदर अपने आप गायब हो जाते हैं। Dr. Nitin Malik चेतावनी देते हैं कि मिनी स्ट्रोक को कभी नजरअंदाज न करें, क्योंकि यह आने वाले बड़े स्ट्रोक का संकेत होता है।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (Brain Stroke Symptoms in Hindi)

Brain stroke symptoms in hindi को पहचानना ही जान बचाने की पहली सीढ़ी है। यदि आप मेरठ में हैं और किसी व्यक्ति में नीचे दिए गए लक्षण देखते हैं, तो तुरंत Nova Hospital Meerut के इमरजेंसी विभाग से संपर्क करें।

ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (brain stroke ke lakshan in hindi) पहचानने के लिए 'BE FAST' नियम का पालन करें:

संकेत विवरण
B - Balance अचानक चलने में कठिनाई, शरीर का संतुलन खोना या चक्कर आना।
E - Eyes एक या दोनों आंखों से अचानक धुंधला दिखना या दृष्टि का पूरी तरह चले जाना।
F - Face चेहरे का एक हिस्सा सुन्न होना या मुस्कुराने पर चेहरे का टेढ़ा हो जाना।
A - Arms हाथ या पैर में कमजोरी महसूस होना। अक्सर शरीर का एक पूरा हिस्सा (left or right side) बेजान हो जाता है।
S - Speech बोलने में लड़खड़ाहट, शब्दों का साफ न निकलना या दूसरों की बात समझने में असमर्थ होना।
T - Time अगर ये लक्षण दिखें, तो बिना समय बर्बाद किए अस्पताल पहुंचें।
अन्य महत्वपूर्ण चेतावनी संकेत (Other Warning Signs):

BE FAST के अलावा ये 4 लक्षण भी स्ट्रोक का संकेत हो सकते हैं:

  • अचानक तेज सिरदर्द: बिना किसी कारण के जीवन का सबसे भयानक सिरदर्द होना।
  • भ्रम या कंफ्यूजन: अचानक समझने, सोचने या याद रखने में परेशानी होना।
  • शरीर के एक हिस्से में सुन्नपन: अचानक चेहरे, हाथ या पैर में झुनझुनी या सुन्नपन महसूस होना।
  • निगलने में कठिनाई: अचानक खाना खाने या पानी पीने में परेशानी महसूस होना।

ब्रेन स्ट्रोक क्यों होता है? (ब्रेन स्ट्रोक क्यों होता है?)

अब सवाल उठता है कि ब्रेन स्ट्रोक क्यों होता है? इसके पीछे कई कारण और रिस्क फैक्टर्स होते हैं जिन्हें समझना जरूरी है।

मेडिकल कारण:

उच्च रक्तचाप (High BP)

140/90 से अधिक बीपी नसों को कमजोर करता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल

नसों में ब्लॉकेज का सबसे बड़ा कारण।

स्ट्रोक रिस्क चेकलिस्ट (Self-Assessment)

यदि आप इनमें से 2 से अधिक पर 'हाँ' टिक करते हैं, तो आज ही न्यूरोसर्जन से मिलें:

ब्रेन स्ट्रोक से बचाव (ब्रेन स्ट्रोक से बचने के उपाय)

ज्यादातर स्ट्रोक के मामलों को सही सावधानी से रोका जा सकता है। ब्रेन स्ट्रोक से बचने के उपाय नीचे दिए गए हैं:

1. संतुलित आहार (Diet Strategy)

अपने भोजन में नमक की मात्रा कम करें। नमक का अधिक सेवन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर बढ़ाता है। फल, हरी सब्जियां, और साबुत अनाज का अधिक सेवन करें। 'पोटेशियम' युक्त भोजन जैसे केला और पालक नसों के लिए अच्छे होते हैं।

2. नियमित व्यायाम (Exercise)

हफ्ते में कम से कम 5 दिन, रोजाना 30 मिनट तक तेज चलें (Brisk Walking)। इससे शरीर का रक्त संचार बेहतर होता है और नसों में ब्लॉकेज की संभावना कम होती है।

3. धूम्रपान और शराब का त्याग

अगर आप स्ट्रोक से बचना चाहते हैं, तो नशीले पदार्थों से पूरी तरह दूरी बना लें। यह न केवल दिमाग बल्कि आपके फेफड़ों और दिल के लिए भी जरूरी है।

4. नियमित जांच (Medical Checkups)

40 की उम्र के बाद, साल में कम से कम एक बार अपने कोलेस्ट्रॉल, बीपी और शुगर की जांच मेरठ के किसी अच्छे अस्पताल जैसे Nova Hospital में जरूर कराएं।

ब्रेन स्ट्रोक का इलाज (Treatment of Brain Stroke)

Dr. Nitin Malik बताते हैं कि स्ट्रोक का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि मरीज अस्पताल कितनी जल्दी पहुंचा है।

गोल्डन ऑवर (Golden Hour) का महत्व

स्ट्रोक होने के बाद शुरुआती 4.5 घंटे को 'गोल्डन ऑवर' कहा जाता है। अगर मरीज इस दौरान पहुंचता है, तो उसे 'थ्रॉम्बोलेसिस' (Clot-busting injection) दिया जा सकता है, जो जमे हुए थक्के को तुरंत पिघला देता है और मरीज कुछ ही घंटों में ठीक होने लगता है।

सर्जिकल इलाज

अगर थक्का बड़ा है या नस फट गई है, तो सर्जरी की जरूरत पड़ती है। Nova Hospital Meerut में हम अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करते हैं जैसे:

  • मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी: एक महीन तार (Catheter) के जरिए दिमाग से थक्के को बाहर निकाला जाता है।
  • क्रेनियोटॉमी: मस्तिष्क का दबाव कम करने के लिए की जाने वाली सर्जरी।
  • एन्यूरिज्म क्लिपिंग: फटी हुई नस को बंद करने की प्रक्रिया।

मेरठ में सर्वश्रेष्ठ न्यूरोसर्जन: Dr. Nitin Malik (Best Neurosurgeon in Meerut)

जब दिमाग की जटिल बीमारी की बात आती है, तो अनुभव ही सबसे बड़ा भरोसा होता है। Dr. Nitin Malik मेरठ के ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के एक प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन हैं। Nova Hospital Meerut में उनके नेतृत्व में एक ऐसी टीम काम करती है जो स्ट्रोक के मरीजों के लिए 24x7 तैयार रहती है। अस्पताल में एडवांस सीटी स्कैन, हाई-टेक न्यूरो-आईसीयू और वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध है, जो मेरठ के किसी भी बड़े हॉस्पिटल के मुकाबले कहीं बेहतर है।

चिकित्सीय संदर्भ (Medical References): यह लेख World Health Organization (WHO) और National Health Portal (India) के मानकों के आधार पर लिखा गया है।

निष्कर्ष (Conclusion)

ब्रेन स्ट्रोक एक डरावनी स्थिति हो सकती है, लेकिन सही जानकारी और त्वरित प्रतिक्रिया (Quick Response) से इसे हराया जा सकता है। ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण पहचानना और समय पर Dr. Nitin Malik जैसे अनुभवी न्यूरोसर्जन के पास पहुँचना ही मरीज की जान बचाने का एकमात्र रास्ता है। Nova Hospital Meerut आपकी सेवा के लिए हमेशा तैयार है।

याद रखें: सतर्कता ही सुरक्षा है। आज ही अपने ब्लड प्रेशर की जांच कराएं और एक स्वस्थ जीवन की ओर कदम बढ़ाएं।

Frequently Asked Questions

ब्रेन स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है जिसमें मस्तिष्क में रक्त प्रवाह या तो रुक जाता है (इस्केमिक) या नस फट जाती है (हेमोरेजिक), जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं।

चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन, बोलने में लड़खड़ाहट, और अचानक संतुलन खोना इसके मुख्य लक्षण हैं।

हाँ, यदि समय पर इलाज मिले और अच्छी रिहैबिलिटेशन (पुनर्वास) थेरेपी ली जाए, तो मरीज काफी हद तक सामान्य जीवन जी सकता है।

तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं या मरीज को नज़दीकी न्यूरोलॉजी अस्पताल ले जाएं। घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें।

स्ट्रोक के लिए हमेशा एक ऐसे अस्पताल का चुनाव करें जहाँ सीटी स्कैन और न्यूरोसर्जन 24 घंटे उपलब्ध हों, जैसे कि नोवा हॉस्पिटल।

हार्ट अटैक दिल की नसों में रुकावट के कारण होता है, जबकि ब्रेन स्ट्रोक मस्तिष्क की नसों में समस्या के कारण होता है। हालांकि दोनों के रिस्क फैक्टर्स (बीपी, शुगर) एक जैसे हो सकते हैं।

हाँ, अगर सही समय पर इलाज मिले और उसके बाद नियमित फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) की जाए, तो शरीर के अंग फिर से काम करना शुरू कर सकते हैं।

नहीं, आजकल के खराब खान-पान और तनाव के कारण 30 से 40 साल के युवाओं में भी स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं।

मेरठ में Nova Hospital (Mawana Road) को न्यूरोलॉजी और स्ट्रोक केयर के लिए सबसे उन्नत केंद्रों में से एक माना जाता है, जहाँ Dr. Nitin Malik जैसे विशेषज्ञ उपलब्ध हैं।

घर पर समय बर्बाद न करें। मरीज को सीधे लेटाएं और तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं। मरीज को कुछ भी खाने या पीने को न दें क्योंकि इससे उनके फेफड़ों में खाना फंस सकता है।

Dr. Nitin Malik

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