ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke): प्रकार, कारण, लक्षण, बचाव और इलाज
December 16, 2025 | By Dr. Kashish Sharma
ब्रेन स्ट्रोक (Brain Stroke) एक गंभीर चिकित्सा स्थिति है, लेकिन सही जानकारी और समय पर इलाज से इसे हराया जा सकता है। जब मस्तिष्क को पर्याप्त रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती, तो मस्तिष्क के हिस्से को ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसके कारण मस्तिष्क की कोशिकाएं मरने लगती हैं।
ब्रेन स्ट्रोक को रोकने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, और धूम्रपान तथा शराब से बचना महत्वपूर्ण है। समय पर मेरठ में न्यूरोलॉजी हॉस्पिटल (best neurology hospital in Meerut) से चिकित्सकीय सहायता लेना भी बेहद जरूरी है, क्योंकि स्ट्रोक के शुरुआती घंटों में उपचार की सफलता की संभावना अधिक होती है।
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ब्रेन स्ट्रोक क्या है? (What is Brain Stroke?)
ब्रेन स्ट्रोक, जिसे हिंदी में मस्तिष्काघात या मस्तिष्क आघात भी कहा जाता है, एक मेडिकल इमरजेंसी है। इसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है। इस रुकावट के कारण उस हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से नष्ट होने लगती हैं।
स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से के अनुसार विभिन्न शारीरिक और मानसिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे कि:
- बोलने में कठिनाई
- चलने में दिक्कत
- देखने या सोचने में परेशानी
अगर सही समय पर इलाज न मिले, तो ब्रेन स्ट्रोक (brain stroke meaning in hindi) से गंभीर और स्थायी नुकसान हो सकता है, जिसमें शारीरिक विकलांगता, याददाश्त की कमी, या यहां तक कि मृत्यु भी शामिल हो सकती है। इसीलिए, ब्रेन स्ट्रोक के लक्षणों (Symptoms of brain stroke) की पहचान कर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण (Symptoms of Brain Stroke in Hindi)
स्ट्रोक की पहचान जितनी जल्दी हो, मरीज की जान बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। निम्नलिखित लक्षणों पर विशेष ध्यान दें:
- चेहरे, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी: विशेष रूप से शरीर के एक तरफ सुन्नपन महसूस होना। उदाहरण के लिए, अचानक एक हाथ या पैर को उठाने में कठिनाई होना।
- बोलने या समझने में कठिनाई: व्यक्ति अचानक बोलने में असमर्थ हो सकता है, उसकी बोली अस्पष्ट (slurred) हो सकती है, या वह दूसरों की बातों को समझ नहीं पा सकता।
- दृष्टि में समस्या: एक या दोनों आंखों से अचानक दिखाई देना बंद होना, धुंधला दिखना, या दो-दो चीजें (double vision) दिखना।
- चलने में कठिनाई: अचानक संतुलन खोना, चक्कर आना, या शरीर के समन्वय (coordination) में समस्या होना। व्यक्ति अचानक गिर सकता है।
- तेज सिरदर्द: बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक और बहुत तीव्र सिरदर्द होना, खासकर अगर यह सिरदर्द उल्टी या चक्कर के साथ हो।
- भ्रम की स्थिति: अचानक मानसिक स्थिति में बदलाव आ सकता है, जैसे कि निर्णय लेने में कठिनाई या बेहोशी छाना।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार (Types of Brain Stroke in Hindi)
मुख्य रूप से ब्रेन स्ट्रोक तीन प्रकार के होते हैं:
1. इस्केमिक स्ट्रोक (Ischemic Stroke)
यह सबसे आम प्रकार का स्ट्रोक है, जो सभी स्ट्रोक मामलों का लगभग 80% होता है। इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में थक्का (clot) जम जाता है या कोई अवरोध उत्पन्न हो जाता है। इसके दो मुख्य उप-प्रकार हैं:
- थ्रोम्बोटिक स्ट्रोक: जब मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में थक्का उसी स्थान पर बनता है।
- एम्बोलिक स्ट्रोक: जब रक्त का थक्का शरीर के किसी अन्य हिस्से (जैसे हृदय) से यात्रा करता है और मस्तिष्क की किसी महीन रक्त वाहिका में जाकर फंस जाता है।
2. हेमोरेजिक स्ट्रोक (Hemorrhagic Stroke)
यह तब होता है जब मस्तिष्क में या उसके आस-पास की कोई रक्त वाहिका फट जाती है (brain hemorrhage)। इस रक्तस्राव के कारण मस्तिष्क के ऊतकों में दबाव बढ़ जाता है। इसके मुख्य कारणों में उच्च रक्तचाप और रक्त वाहिकाओं की कमजोरी शामिल है।
- इंट्रासेरेब्रल हेमोरेज: मस्तिष्क के अंदर की रक्त वाहिका का फटना।
- सबएराक्नॉइड हेमोरेज: मस्तिष्क और उसकी बाहरी परत के बीच रक्तस्राव होना।
3. क्षणिक इस्कैमिक दौरा (TIA - Mini Stroke)
टीआईए को "मिनी स्ट्रोक" भी कहा जाता है। यह एक चेतावनी संकेत है। इसमें रक्त का प्रवाह बहुत थोड़े समय (कुछ मिनटों) के लिए बाधित होता है और लक्षण अपने आप ठीक हो जाते हैं। इसे कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए क्योंकि यह भविष्य में बड़े स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक के कारण (Causes of Brain Stroke in Hindi)
कई कारक ब्रेन स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ाते हैं। इनमें से प्रमुख हैं:
- उच्च रक्तचाप (High BP): यह स्ट्रोक का सबसे बड़ा जोखिम कारक है। अनियंत्रित बीपी नसों को कमजोर कर देता है।
- धूम्रपान: यह रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ता है और थक्के बनने की प्रक्रिया को तेज करता है।
- मधुमेह (Diabetes): हाई ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है।
- उच्च कोलेस्ट्रॉल: यह धमनियों में प्लाक (चर्बी) जमा करता है, जिससे रक्त प्रवाह रुक सकता है।
- हृदय रोग: अनियमित दिल की धड़कन (Atrial Fibrillation) से थक्के बन सकते हैं जो दिमाग तक पहुंच सकते हैं।
- मोटापा और निष्क्रियता: शारीरिक गतिविधि न करने और वजन बढ़ने से बीपी और शुगर की समस्या होती है।
- शराब का अत्यधिक सेवन: यह बीपी बढ़ाता है और नसों को कमजोर करता है।
- तनाव: अत्यधिक मानसिक तनाव भी स्ट्रोक को न्योता दे सकता है।
ब्रेन स्ट्रोक से बचाव (Prevention of Brain Stroke)
"इलाज से बेहतर बचाव है।" अपनी जीवनशैली में थोड़े बदलाव करके आप स्ट्रोक के खतरे को काफी हद तक कम कर सकते हैं:
- स्वस्थ आहार लें: ताजे फल, सब्जियां, और फाइबर युक्त भोजन करें। नमक और चीनी का सेवन कम करें।
- नियमित व्यायाम: सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम गतिविधि (जैसे तेज चलना) करें।
- वजन नियंत्रित रखें: मोटापे से बचें।
- नशे से दूरी: धूम्रपान पूरी तरह छोड़ दें और शराब का सेवन सीमित करें।
- नियमित जांच: अपने ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करवाएं और डॉक्टर की सलाह मानें।
- तनाव प्रबंधन: योग और ध्यान के माध्यम से तनाव को कम करें।
- पर्याप्त नींद: रोजाना 7-8 घंटे की अच्छी नींद लेना जरूरी है।
ब्रेन स्ट्रोक का इलाज (Treatment of Brain Stroke)
स्ट्रोक का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार का है।
इस्केमिक स्ट्रोक का इलाज
इसका उद्देश्य रक्त के थक्के को हटाना है।
- IV tPA (Thrombolytic drugs): यह इंजेक्शन लक्षण शुरू होने के 4.5 घंटे के अंदर दिया जाना चाहिए। यह थक्के को घोल देता है।
- मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी: एक कैथेटर के जरिए थक्के को भौतिक रूप से बाहर निकाला जाता है।
- दवाएं: खून पतला करने वाली दवाएं (एस्पिरिन आदि) दी जाती हैं।
हेमोरेजिक स्ट्रोक का इलाज
इसका उद्देश्य रक्तस्राव को रोकना और दिमाग पर पड़ रहे दबाव को कम करना है।
- दवाएं: ब्लड प्रेशर कम करने और मस्तिष्क का सूजन कम करने की दवाएं।
- सर्जरी (Surgery): यदि रक्तस्राव अधिक है, तो क्लिपिंग (Clipping) या कोइलिंग (Coiling) जैसी सर्जरी की जा सकती है। गंभीर मामलों में 'क्रेनियोटॉमी' की जाती है।
पुनर्वास (Rehabilitation)
स्ट्रोक के बाद रिकवरी (recovery of brain stroke in hindi) के लिए पुनर्वास सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है:
- फिजिकल थेरेपी: चलने-फिरने और शारीरिक ताकत वापस पाने के लिए।
- स्पीच थेरेपी: बोलने और समझने की क्षमता सुधारने के लिए।
- ऑक्यूपेशनल थेरेपी: रोजमर्रा के काम (जैसे बटन लगाना, खाना खाना) दोबारा सीखने के लिए।
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निष्कर्ष (Conclusion)
ब्रेन स्ट्रोक जीवन के लिए खतरनाक हो सकता है, लेकिन जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा बचाव है। लक्षणों को पहचानना और 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती कुछ घंटे) के भीतर इलाज शुरू करना महत्वपूर्ण है। अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करें।
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