दिल्ली में बढ़ते फ्लू के मामले: H1N1, H3N2 और Influenza B में फर्क कैसे पहचानें?
Updated on: August 11, 2026 | Medically reviewed by: Dr. Vikrant Solanki
दिल्ली-NCR में मानसून के इस मौसम में फ्लू से जुड़ी खबरें लगातार सुर्खियों में हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस साल अब तक दिल्ली में H1N1 (स्वाइन फ्लू) के करीब 1,344 मामले सामने आ चुके हैं, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा लगभग 229 था — यानी रिपोर्ट किए गए मामलों में करीब छह गुना बढ़ोतरी। इसके साथ ही H3N2 और Influenza B जैसे फ्लू के अन्य स्ट्रेन भी शहर में सक्रिय बताए जा रहे हैं। इस लेख में हम आसान भाषा में समझाएंगे कि H1N1, H3N2 और Influenza B में क्या अंतर है, इनके लक्षण क्या हैं, कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है और खुद को व परिवार को कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है।
क्विक आंसर: H1N1, H3N2 और Influenza B — तीनों ही इन्फ्लूएंजा वायरस के अलग-अलग प्रकार हैं जो मौसमी फ्लू का कारण बनते हैं। तीनों में बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान जैसे मिलते-जुलते लक्षण होते हैं। अकेले लक्षणों के आधार पर यह बताना संभव नहीं कि किसी व्यक्ति को कौन-सा स्ट्रेन हुआ है — इसके लिए जांच जरूरी होती है। बुखार लगातार बना रहे, सांस लेने में तकलीफ हो, या बच्चों/बुजुर्गों/गर्भवती महिलाओं/पुरानी बीमारी वाले लोगों में लक्षण गंभीर हों, तो बिना देर किए डॉक्टर से संपर्क करें।
अगर आपको या परिवार में किसी को तेज बुखार, सांस लेने में तकलीफ या लक्षण लगातार बिगड़ते दिख रहे हैं, तो घर पर इंतजार करने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं। Nova Hospital में मरीज की स्थिति के अनुसार जांच और उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
दिल्ली में फ्लू के मामले क्यों बढ़ रहे हैं?
दिल्ली में हर साल मानसून के दौरान और मौसम बदलने के समय फ्लू (इन्फ्लूएंजा) के मामलों में बढ़ोतरी देखी जाती है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त 2026 में दिल्ली में H1N1 के मामलों में पिछले साल की तुलना में करीब छह गुना वृद्धि बताई गई है, और शहर में हाल के दिनों में स्वाइन फ्लू से जुड़ी कुछ बच्चों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं। इसके बाद दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को सतर्क रहने और मरीजों के समय पर इलाज के निर्देश दिए हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये आंकड़े मीडिया में रिपोर्ट किए गए हैं। किसी भी आधिकारिक घोषणा या सटीक अद्यतन संख्या के लिए दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग, राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) या केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आधिकारिक स्रोतों को देखना बेहतर रहता है, क्योंकि संख्याएं समय के साथ बदल सकती हैं।
फ्लू के मामले बढ़ने के पीछे आमतौर पर ये कारण माने जाते हैं:
- मौसम में बार-बार बदलाव और नमी बढ़ना, जिससे वायरस के फैलने के अनुकूल स्थितियां बनती हैं
- भीड़भाड़ वाली जगहों (बाजार, स्कूल, सार्वजनिक परिवहन) में नज़दीकी संपर्क
- वायु प्रदूषण के कारण श्वसन तंत्र की सुरक्षा क्षमता कमजोर होना
- एक ही समय में कई इन्फ्लूएंजा स्ट्रेन (H1N1, H3N2, Influenza B) का सक्रिय रहना
यह बताना जरूरी है कि "फ्लू के मामलों में वृद्धि" और "महामारी (outbreak)" एक ही बात नहीं हैं। जब तक कोई अधिकृत स्वास्थ्य एजेंसी औपचारिक रूप से महामारी घोषित न करे, तब तक स्थिति को मौसमी फ्लू में वृद्धि के तौर पर ही समझना उचित है — हालांकि इसे गंभीरता से लेना और सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर उच्च-जोखिम समूहों के लिए।
H1N1, H3N2 और Influenza B क्या हैं?
तीनों ही इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रकार हैं, लेकिन इनकी वायरोलॉजिकल पहचान अलग-अलग है:
- H1N1 → इन्फ्लूएंजा A वायरस का एक सबटाइप, जिसे आमतौर पर "स्वाइन फ्लू" कहा जाता है
- H3N2 → इन्फ्लूएंजा A वायरस का दूसरा सबटाइप
- Influenza B → एक अलग प्रकार का इन्फ्लूएंजा वायरस, जिसे उप-प्रकारों (H और N) में विभाजित नहीं किया जाता
| वायरस/स्ट्रेन | यह क्या है? | सामान्य लक्षण | गंभीर बीमारी का जोखिम |
|---|---|---|---|
| H1N1 (स्वाइन फ्लू) | इन्फ्लूएंजा A वायरस का सबटाइप | तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द, थकान, कभी-कभी उल्टी/दस्त | बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पुरानी बीमारी वाले लोगों में जटिलताओं (जैसे निमोनिया) का जोखिम अधिक बताया जाता है |
| H3N2 | इन्फ्लूएंजा A वायरस का सबटाइप | तेज बुखार, गंभीर बदन दर्द, लगातार खांसी, गले में खराश, थकान | कई रिपोर्टों में लक्षण अपेक्षाकृत लंबे समय तक बने रहने और रिकवरी में अधिक समय लगने की बात कही गई है, विशेषकर उच्च-जोखिम समूहों में |
| Influenza B | अलग इन्फ्लूएंजा वायरस प्रकार | बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, थकान — आमतौर पर इन्फ्लूएंजा A जैसे ही लक्षण | आमतौर पर बच्चों में अधिक देखा जाता है; गंभीरता व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है |
ध्यान दें: ऊपर दी गई जानकारी सामान्य चिकित्सीय समझ पर आधारित है। किसी भी मरीज में वास्तविक गंभीरता उसकी उम्र, प्रतिरक्षा क्षमता और पहले से मौजूद बीमारियों पर निर्भर करती है।
फ्लू के सामान्य लक्षण क्या हैं?
H1N1, H3N2 और Influenza B — तीनों में कई लक्षण एक जैसे होते हैं। आम तौर पर फ्लू के लक्षणों में शामिल हैं:
- अचानक तेज बुखार
- ठंड लगना (chills)
- सूखी या बलगम वाली खांसी
- गले में खराश
- नाक बहना या बंद होना
- सिरदर्द
- शरीर और मांसपेशियों में दर्द
- अत्यधिक थकान और कमजोरी
सभी मरीजों में सभी लक्षण एक जैसे नहीं होते — कुछ में हल्के लक्षण होते हैं तो कुछ में शुरुआत से ही तेज बुखार और कमजोरी दिखाई देती है। उम्र, टीकाकरण की स्थिति और पहले से मौजूद बीमारियां भी लक्षणों की तीव्रता पर असर डालती हैं।
H1N1 के लक्षण
क्या हैं H1N1 के शुरुआती लक्षण? H1N1 (स्वाइन फ्लू) की शुरुआत आमतौर पर अचानक तेज बुखार, खांसी और गले में खराश से होती है, इसके साथ बदन दर्द और थकान भी हो सकती है।
कुछ मरीजों में इसके अतिरिक्त ये लक्षण भी देखे जा सकते हैं:
- उल्टी या दस्त (विशेषकर बच्चों में)
- सांस लेने में तकलीफ (गंभीर मामलों में)
- सीने में जकड़न
अगर बुखार के साथ सांस फूलना, सीने में दर्द या लगातार उल्टी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए।
H3N2 के लक्षण
H3N2 के क्या लक्षण होते हैं? H3N2 में आमतौर पर तेज बुखार, गंभीर बदन दर्द, लगातार खांसी और गले में खराश देखी जाती है। कई रिपोर्टों के अनुसार H3N2 से जुड़ी खांसी और थकान सामान्य फ्लू की तुलना में अधिक समय तक बनी रह सकती है।
- तेज बुखार, जो कई दिनों तक बना रह सकता है
- लगातार, कभी-कभी दो हफ्तों तक चलने वाली खांसी
- गंभीर बदन दर्द और थकान
- कुछ मामलों में सांस लेने में तकलीफ
बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में H3N2 से निमोनिया जैसी जटिलताएं होने की संभावना पर मेडिकल रिपोर्टों में ध्यान दिया गया है, इसलिए इस समूह में लक्षण दिखते ही जल्दी चिकित्सीय सलाह लेना उपयुक्त माना जाता है।
Influenza B के लक्षण
Influenza B क्या है और इसके लक्षण क्या हैं? Influenza B, इन्फ्लूएंजा A (H1N1, H3N2) से अलग वायरस प्रकार है, लेकिन इसके लक्षण काफी हद तक मिलते-जुलते हैं — बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और थकान। यह वायरस अक्सर बच्चों और युवाओं में अधिक देखा जाता है।
Influenza B आमतौर पर इन्फ्लूएंजा A की तुलना में कम गंभीर माना जाता है, लेकिन यह हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और उच्च-जोखिम समूहों में इससे भी जटिलताएं हो सकती हैं।
बच्चों में फ्लू के लक्षण
बच्चों में फ्लू के लक्षण पहचानना मुश्किल हो सकता है क्योंकि वे हमेशा अपनी परेशानी सही तरीके से बता नहीं पाते। अभिभावकों को इन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए:
- तेज बुखार
- लगातार खांसी
- दूध/खाना पीने-खाने में कमी
- चिड़चिड़ापन या असामान्य सुस्ती
- कमजोरी
- सांस लेने में तकलीफ या तेज सांस चलना
- डिहाइड्रेशन के संकेत — जैसे मुंह सूखना, कम पेशाब आना, रोते समय आंसू न आना
अगर बच्चे में सांस लेने में तकलीफ, होंठ/चेहरे का रंग नीला पड़ना, बहुत अधिक सुस्ती, या बुखार के साथ दौरे जैसे लक्षण दिखें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी मानी जाती है और तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
बुजुर्गों और हाई-रिस्क लोगों में फ्लू
कुछ समूहों में फ्लू के गंभीर रूप लेने का जोखिम अपेक्षाकृत अधिक माना जाता है:
- 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बुजुर्ग
- 5 वर्ष से कम उम्र के छोटे बच्चे
- गर्भवती महिलाएं
- दमा या अन्य पुरानी श्वसन बीमारी वाले लोग
- हृदय रोग से पीड़ित लोग
- मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग (जैसे कैंसर उपचार ले रहे मरीज या अन्य इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड स्थितियां)
इसका मतलब यह नहीं कि इन समूहों के हर व्यक्ति को गंभीर बीमारी होगी, लेकिन इनमें लक्षण दिखते ही जल्दी डॉक्टर से सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम में क्या अंतर है?
फ्लू और सर्दी-जुकाम में क्या फर्क है? फ्लू आमतौर पर अचानक और तेज लक्षणों के साथ शुरू होता है, जबकि सामान्य सर्दी-जुकाम धीरे-धीरे और हल्के लक्षणों के साथ शुरू होता है।
| विशेषता | सामान्य सर्दी | फ्लू |
|---|---|---|
| शुरुआत | धीरे-धीरे | अचानक |
| बुखार | आमतौर पर नहीं या हल्का | अक्सर तेज बुखार |
| शरीर दर्द | हल्का | अक्सर गंभीर |
| थकान | हल्की | अधिक और लंबे समय तक |
| खांसी | हल्की से मध्यम | अक्सर तेज और लगातार |
| गंभीरता | आमतौर पर हल्की | कुछ मामलों में गंभीर जटिलताओं की संभावना |
यह ध्यान रखना जरूरी है कि सिर्फ लक्षणों के आधार पर हमेशा यह निश्चित रूप से बताना संभव नहीं होता कि किसी व्यक्ति को सर्दी है या फ्लू — खासकर शुरुआती दिनों में। संदेह होने पर डॉक्टर से जांच कराना बेहतर रहता है।
H1N1, H3N2 और Influenza B में अंतर
| पहलू | H1N1 | H3N2 | Influenza B |
|---|---|---|---|
| वायरस प्रकार | इन्फ्लूएंजा A सबटाइप | इन्फ्लूएंजा A सबटाइप | अलग इन्फ्लूएंजा प्रकार |
| सामान्य नाम | स्वाइन फ्लू | — | — |
| प्रमुख लक्षण | तेज बुखार, खांसी, उल्टी/दस्त (कभी-कभी) | तेज बुखार, गंभीर बदन दर्द, लंबी खांसी | बुखार, खांसी, सिरदर्द, थकान |
| अधिक प्रभावित समूह | बच्चे, गर्भवती महिलाएं, पुरानी बीमारी वाले लोग | बुजुर्ग, पुरानी बीमारी वाले लोग | अक्सर बच्चे व युवा |
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझनी जरूरी है: अकेले लक्षणों के आधार पर यह निश्चित रूप से पहचानना संभव नहीं है कि किसी व्यक्ति को H1N1, H3N2 या Influenza B में से कौन-सा संक्रमण हुआ है। सटीक पहचान के लिए प्रयोगशाला जांच की आवश्यकता होती है।
फ्लू की जांच कैसे होती है?
फ्लू का निदान आमतौर पर डॉक्टर द्वारा नैदानिक मूल्यांकन (क्लिनिकल एग्जामिनेशन) से शुरू होता है — यानी लक्षणों, मरीज के इतिहास और शारीरिक जांच के आधार पर। कुछ स्थितियों में डॉक्टर लैब जांच की सलाह दे सकते हैं, जैसे:
- रैपिड एंटीजन टेस्ट — जल्दी परिणाम देने वाला टेस्ट, हालांकि इसकी सटीकता सीमित हो सकती है
- RT-PCR/मॉलिक्यूलर टेस्ट — अधिक सटीक जांच, जो विशेष स्थितियों में उपयोग की जाती है
यह जरूरी नहीं कि फ्लू जैसे हल्के लक्षण वाले हर व्यक्ति को लैब टेस्ट कराने की जरूरत हो। जांच कराने का निर्णय मरीज की उम्र, लक्षणों की गंभीरता, हाई-रिस्क स्थिति और डॉक्टर के क्लिनिकल आकलन पर निर्भर करता है।
फ्लू का इलाज कैसे होता है?
ज्यादातर स्वस्थ लोगों में फ्लू अपने आप, आराम और सामान्य देखभाल से कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। इलाज में आमतौर पर शामिल होता है:
- पर्याप्त आराम
- तरल पदार्थों का सेवन (पानी, तरल भोजन) ताकि डिहाइड्रेशन न हो
- डॉक्टर की सलाह अनुसार बुखार व दर्द को नियंत्रित करने वाली दवाएं
- कुछ हाई-रिस्क मरीजों में डॉक्टर एंटीवायरल दवाओं की सलाह दे सकते हैं, खासकर अगर लक्षण शुरू होने के जल्द बाद इलाज शुरू किया जाए
यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि फ्लू एक वायरल बीमारी है और एंटीबायोटिक दवाएं वायरस पर असर नहीं करतीं। एंटीबायोटिक्स केवल तब दी जाती हैं जब डॉक्टर को साथ में कोई बैक्टीरियल इंफेक्शन (जैसे बैक्टीरियल निमोनिया) होने का संदेह या पुष्टि हो। बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक लेना उचित नहीं है और इससे बीमारी ठीक नहीं होती।
यहां किसी भी दवा की खुराक या नाम की सिफारिश नहीं की जा रही है — इलाज हमेशा डॉक्टर के परामर्श और मरीज की स्थिति के अनुसार ही तय होना चाहिए। यदि आपके या परिवार के किसी सदस्य के लक्षण बढ़ रहे हैं, तो Nova Hospital में डॉक्टर से जांच कराई जा सकती है।
क्या H1N1 का इलाज संभव है?
क्या H1N1 ठीक हो सकता है? हां, ज्यादातर लोग उचित देखभाल, आराम और जरूरत पड़ने पर डॉक्टरी इलाज से H1N1 से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि उच्च-जोखिम समूहों में जटिलताओं की संभावना अधिक होती है, इसलिए ऐसे मरीजों को जल्द चिकित्सीय मूल्यांकन कराने की सलाह दी जाती है। यह याद रखना जरूरी है कि किसी भी बीमारी में "100% गारंटीड इलाज" जैसा दावा उचित नहीं है — इलाज का परिणाम मरीज की स्थिति, उम्र और समय पर मिली देखभाल पर निर्भर करता है।
फ्लू में घर पर क्या सावधानी रखें?
- पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे
- भरपूर आराम करें
- बीमार होने पर परिवार के अन्य सदस्यों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों से नज़दीकी संपर्क से बचें
- जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें, विशेषकर घर में किसी हाई-रिस्क व्यक्ति के आसपास
- बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइज़र का उपयोग करें
- कमरे में हवा का आवागमन बना रहने दें (वेंटिलेशन)
- जहां संभव हो, बीमार होने पर घर पर ही रहें और भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें
- डॉक्टर द्वारा बताई गई सलाह का पालन करें
फ्लू से बचाव कैसे करें?
फ्लू से बचाव के लिए निम्नलिखित उपाय कारगर माने जाते हैं:
- हाथों की स्वच्छता — साबुन-पानी से नियमित रूप से हाथ धोना
- रेस्पिरेटरी एटिकेट — खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकना, टिशू का सही निस्तारण
- वेंटिलेशन — घर और कार्यस्थल पर हवा का आवागमन बनाए रखना
- बीमार लोगों से दूरी — फ्लू के लक्षण वाले व्यक्ति से नज़दीकी संपर्क सीमित करना
- उपयुक्त स्थितियों में मास्क का उपयोग — भीड़भाड़ वाली या हाई-रिस्क जगहों पर
- टीकाकरण — डॉक्टर से फ्लू वैक्सीन के बारे में सलाह लेना, खासकर उच्च-जोखिम समूहों के लिए
फ्लू वैक्सीन किसे लगवानी चाहिए?
सामान्यतः फ्लू वैक्सीन को उच्च-जोखिम समूहों के लिए अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है — जैसे बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, पुरानी बीमारियों (हृदय रोग, डायबिटीज, श्वसन रोग) से पीड़ित लोग और स्वास्थ्यकर्मी। हालांकि, वैक्सीन किसे, कब और कौन-सी लगवानी चाहिए — यह व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सीय इतिहास पर निर्भर करता है। इसलिए फ्लू वैक्सीन को लेकर सबसे सही सलाह अपने डॉक्टर से व्यक्तिगत रूप से परामर्श करके ही ली जानी चाहिए।
फ्लू में कब डॉक्टर को दिखाना चाहिए?
निम्नलिखित स्थितियों में डॉक्टर से संपर्क करना उचित है:
- बुखार लगातार बना रहे या तीन-चार दिन बाद भी कम न हो
- लक्षण धीरे-धीरे बढ़ते जा रहे हों
- सांस लेने में हल्की तकलीफ महसूस हो
- सीने में असहजता या दर्द हो
- असामान्य कमजोरी या थकान बनी रहे
- शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) के संकेत दिखें
- पहले से मौजूद बीमारी (जैसे डायबिटीज, हृदय रोग, अस्थमा) के लक्षण बिगड़ें
- बीमारी में सुधार के बाद अचानक लक्षण फिर से बढ़ जाएं
- हाई-रिस्क समूह (बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोग) में कोई भी उल्लेखनीय लक्षण दिखे
फ्लू में कब तुरंत अस्पताल जाना चाहिए?
निम्नलिखित लक्षणों को इमरजेंसी वॉर्निंग साइन माना जाता है — इनमें देर न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल जाएं:
- सांस लेने में गंभीर तकलीफ या सांस फूलना
- सीने में लगातार दर्द या दबाव
- होंठ, चेहरे या नाखूनों का रंग नीला पड़ना
- अत्यधिक भ्रम, बेहोशी या असामान्य व्यवहार
- तेज चक्कर या खड़े होने में असमर्थता
- बच्चों में लगातार रोना, न जागना, या तेज सांस चलना
- गंभीर डिहाइड्रेशन के संकेत (जैसे पेशाब बहुत कम आना)
- पुरानी बीमारी का अचानक गंभीर रूप से बिगड़ना
ऐसी स्थिति में घर पर इंतजार न करें। तुरंत नजदीकी अस्पताल की इमरजेंसी सेवा से संपर्क करें। Nova Hospital में मरीज की स्थिति के अनुसार आपातकालीन मूल्यांकन और उपचार उपलब्ध है।
क्या H1N1 या फ्लू जानलेवा हो सकता है?
ज्यादातर लोग फ्लू से पूरी तरह ठीक हो जाते हैं, और यह हमेशा गंभीर या जानलेवा नहीं होता। हालांकि, कुछ मामलों में — विशेषकर हाई-रिस्क समूहों में — फ्लू से निमोनिया और अन्य जटिलताएं हो सकती हैं, जो गंभीर रूप ले सकती हैं। दिल्ली में हाल की कुछ मीडिया रिपोर्टों में स्वाइन फ्लू से जुड़ी बच्चों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि उच्च-जोखिम समूहों में समय पर चिकित्सीय ध्यान क्यों जरूरी है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को घबराने की जरूरत है — बल्कि इसका मतलब है कि लक्षण दिखते ही सतर्क रहना और गंभीर लक्षणों की स्थिति में समय पर चिकित्सीय सहायता लेना जरूरी है, खासकर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से बीमार लोगों के लिए।
दिल्ली/NCR में फ्लू से बचने के लिए 10 जरूरी सावधानियां
- बार-बार साबुन-पानी से हाथ धोएं या सैनिटाइज़र का उपयोग करें
- खांसते-छींकते समय मुंह और नाक ढकें
- भीड़भाड़ वाली जगहों पर उपयुक्त होने पर मास्क पहनें
- बीमार व्यक्ति से नज़दीकी संपर्क से बचें
- घर और कार्यस्थल पर वेंटिलेशन बनाए रखें
- पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखें
- बुखार या फ्लू के लक्षण होने पर घर पर आराम करें, बाहर जाने से बचें
- बच्चों और बुजुर्गों के आसपास अतिरिक्त सावधानी बरतें
- फ्लू वैक्सीन को लेकर डॉक्टर से परामर्श करें, खासकर हाई-रिस्क होने पर
- लक्षण गंभीर या लगातार बने रहने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराएं
दिल्ली-NCR में इस मौसम में फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी की खबरों के बीच सतर्क रहना जरूरी है, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं। सही जानकारी, समय पर सावधानी और जरूरत पड़ने पर उचित चिकित्सीय सलाह से इस मौसम को सुरक्षित रूप से पार किया जा सकता है। यदि आपके परिवार में किसी को फ्लू के गंभीर लक्षण दिख रहे हैं, तो Nova Hospital में डॉक्टर से मूल्यांकन कराने में देरी न करें।