प्लेटलेट काउंट को तेजी से कैसे बढ़ाएं? 10 सुरक्षित तरीके, क्या खाएं और कब डॉक्टर से मिलें

Updated on: August 18, 2026 | Medically reviewed by: Dr Dimpi Malik

प्लेटलेट काउंट को तेजी से कैसे बढ़ाएं? 10 सुरक्षित तरीके, क्या खाएं और कब डॉक्टर से मिलें

अगर आपकी CBC रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम आए हैं, तो सबसे पहला ख्याल यही आता है — अब इन्हें जल्दी कैसे बढ़ाएं। गूगल पर सर्च करते ही पपीते के पत्ते, अनार, कीवी और न जाने कितने घरेलू नुस्खे सामने आ जाते हैं। लेकिन असल सवाल यह नहीं है कि कौन सी चीज खाने से नंबर तुरंत ऊपर जाएगा। असल सवाल यह है कि आपके प्लेटलेट्स कम क्यों हुए हैं।

प्लेटलेट काउंट कम होने के पीछे बुखार, वायरल इंफेक्शन, डेंगू, किसी दवा का असर, पोषण की कमी या कोई और वजह हो सकती है। और इलाज उसी वजह पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ रिपोर्ट में लिखे नंबर पर। इस लेख में हम यही समझेंगे — प्लेटलेट्स क्या होते हैं, इनके कम होने का क्या मतलब है, रिकवरी में क्या मदद करता है, और किन संकेतों पर देर किए बिना डॉक्टर के पास जाना चाहिए।

प्लेटलेट काउंट को तेजी से कैसे बढ़ाएं? (Quick Answer)

सच यह है कि कोई भी एक फल या घरेलू नुस्खा प्लेटलेट्स को तुरंत नहीं बढ़ाता। सबसे जरूरी कदम है कम प्लेटलेट्स की वजह पता करना — क्योंकि इलाज उसी पर निर्भर करता है। पौष्टिक खाना, पर्याप्त पानी और आराम शरीर की रिकवरी में मदद जरूर करते हैं, लेकिन ये किसी दवा या मेडिकल इलाज का विकल्प नहीं हैं। डेंगू या किसी गंभीर वजह से प्लेटलेट्स कम हुए हों, तो नियमित ब्लड टेस्ट के जरिए डॉक्टर की निगरानी जरूरी होती है। अगर ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा कमजोरी या और कोई गंभीर लक्षण दिखे, तो तुरंत मेडिकल मदद लें — घर पर इंतजार न करें।

प्लेटलेट्स क्या होते हैं और शरीर में इनका काम क्या है?

प्लेटलेट्स (जिन्हें थ्रोम्बोसाइट्स भी कहा जाता है) खून में मौजूद बेहद छोटी कोशिकाएं हैं। इनका मुख्य काम है चोट लगने पर खून का थक्का बनाना, ताकि ब्लीडिंग रुक सके। ये अस्थि मज्जा (bone marrow) में बनती हैं, जहां शरीर लगातार नई रक्त कोशिकाओं का उत्पादन करता रहता है।

एक सामान्य वयस्क में प्लेटलेट काउंट आमतौर पर 1,50,000 से 4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर के बीच रहता है। जब यह संख्या इससे नीचे चली जाती है, तो शरीर की चोट के बाद खून रोकने की क्षमता प्रभावित हो सकती है — छोटी चोट से भी ज्यादा देर तक खून बहना, बार-बार नील पड़ना, या मसूड़ों-नाक से खून आना जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने का मतलब क्या है?

मेडिकल भाषा में प्लेटलेट काउंट कम होने को थ्रोम्बोसाइटोपेनिया (Thrombocytopenia) कहा जाता है। लेकिन एक बात समझनी जरूरी है — सिर्फ नंबर देखकर घबराने की बजाय, डॉक्टर पूरी तस्वीर देखते हैं: लक्षण क्या हैं, ब्लीडिंग हो रही है या नहीं, नंबर कितनी तेजी से गिर रहा है, कोई पुरानी बीमारी है या नहीं, उम्र क्या है, और अगर महिला गर्भवती है तो वह स्थिति भी मायने रखती है।

प्लेटलेट रेंज (प्रति µL) सामान्य समझ क्या ध्यान रखें
1,50,000 – 4,50,000 सामान्य श्रेणी नियमित सेहत की आदतें बनाए रखें
1,00,000 – 1,50,000 हल्की कमी अक्सर बिना लक्षण के; कारण जानने के लिए डॉक्टर से बात करें
50,000 – 1,00,000 मध्यम कमी डॉक्टर की निगरानी में रहना बेहतर, खासकर बुखार/इंफेक्शन के दौरान
50,000 से कम अधिक कमी ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है; मेडिकल मूल्यांकन जरूरी

ध्यान रहे: यह तालिका केवल सामान्य समझ के लिए है, कोई तय नियम नहीं। एक ही नंबर अलग-अलग लोगों के लिए अलग मायने रख सकता है — इसका फैसला डॉक्टर लक्षण और पूरी मेडिकल हिस्ट्री देखकर करते हैं।

प्लेटलेट्स कम होने के 10 आम कारण

यह समझना जरूरी है कि कम प्लेटलेट काउंट खुद एक बीमारी नहीं है — यह किसी अंदरूनी वजह का संकेत (sign) होता है। कुछ आम कारण इस तरह हैं:

  1. डेंगू और कुछ अन्य वायरल इंफेक्शन
  2. सामान्य वायरल बुखार जो अपने-आप ठीक हो जाते हैं
  3. इम्यून सिस्टम से जुड़ी स्थितियां, जिनमें शरीर गलती से अपने प्लेटलेट्स को नष्ट करने लगता है (जैसे ITP)
  4. कुछ दवाओं का साइड इफेक्ट
  5. विटामिन B12 या फोलेट की कमी
  6. लीवर से जुड़ी बीमारियां
  7. तिल्ली (spleen) का बड़ा होना
  8. बोन मैरो से जुड़े विकार
  9. गर्भावस्था के दौरान होने वाली कुछ स्थितियां
  10. अन्य पुरानी बीमारियां या इंफेक्शन

इसीलिए हर कम प्लेटलेट काउंट को डेंगू मानकर घबराना सही नहीं है। सही कारण जाने बिना सिर्फ किसी घरेलू नुस्खे पर भरोसा करना भी उतना ही गलत है।

प्लेटलेट्स की रिकवरी को सपोर्ट करने के 10 सुरक्षित तरीके

नीचे दिए गए तरीके प्लेटलेट्स को "गारंटीड" तेजी से बढ़ाने का दावा नहीं करते — बल्कि यह बताते हैं कि शरीर की प्राकृतिक रिकवरी प्रक्रिया को किस तरह सपोर्ट किया जा सकता है।

1. सबसे पहले कारण पता करें

घरेलू उपाय शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि प्लेटलेट्स क्यों कम हुए हैं। इसके लिए CBC (Complete Blood Count) टेस्ट और डॉक्टर की जांच जरूरी है। बिना कारण जाने इलाज करना समस्या को छिपा सकता है, ठीक नहीं करता।

2. पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें

खासकर बुखार, उल्टी या दस्त की स्थिति में शरीर में पानी की कमी हो सकती है, जो रिकवरी को धीमा कर सकती है। पानी के साथ नारियल पानी, सूप या जरूरत पड़ने पर ORS भी मदद कर सकता है। कितना पानी सही है, यह हर व्यक्ति की स्थिति, उम्र और मौसम पर निर्भर करता है — इसलिए कोई एक तय मात्रा सभी के लिए नहीं बताई जा सकती।

3. प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित खाना खाएं

दाल, अंडे, दूध-दही, मछली, कम वसा वाला मांस और मेवे शरीर को वे बिल्डिंग ब्लॉक्स देते हैं जिनकी जरूरत रक्त कोशिकाओं के निर्माण में होती है। यह प्लेटलेट्स को सीधे "बढ़ाने" की गारंटी नहीं है, लेकिन शरीर की समग्र रिकवरी क्षमता को जरूर सहारा देता है।

4. विटामिन B12 और फोलेट की कमी को नजरअंदाज न करें

पालक, दालें, अंडे, दूध और साबुत अनाज इनके अच्छे स्रोत हैं। अगर जांच में इनकी कमी पाई जाए, तो डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना मददगार हो सकता है — बिना जांच के खुद से सप्लीमेंट शुरू करने से बचें।

5. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट युक्त फल-सब्जियां शामिल करें

आंवला, अमरूद, संतरा, कीवी और शिमला मिर्च जैसी चीजें पोषण की दृष्टि से फायदेमंद हैं और शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करती हैं। लेकिन इन्हें "गारंटीड प्लेटलेट बूस्टर" समझना सही नहीं होगा — ये सिर्फ संतुलित आहार और रिकवरी का हिस्सा हैं।

6. डेंगू में आराम और डॉक्टर की निगरानी को प्राथमिकता दें

डेंगू के दौरान प्लेटलेट काउंट स्वाभाविक रूप से गिर सकता है। ऐसे में सबसे जरूरी है आराम, पानी की पर्याप्त मात्रा और नियमित ब्लड टेस्ट के जरिए निगरानी। किसी एक फूड आइटम के पीछे भागने से ज्यादा जरूरी है इन चेतावनी संकेतों पर ध्यान देना: लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, ब्लीडिंग, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी, सांस लेने में दिक्कत। इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो तुरंत अस्पताल जाएं।

7. पपीते के पत्ते का अर्क: क्या सच में प्लेटलेट्स बढ़ाता है?

पपीते के पत्तों का रस भारत में डेंगू के दौरान एक लोकप्रिय घरेलू उपाय बन चुका है। कुछ शोधों में पपीते के पत्ते में मौजूद यौगिकों के प्लेटलेट काउंट पर संभावित असर की बात कही गई है, खासकर डेंगू से जुड़ी थ्रोम्बोसाइटोपेनिया में। लेकिन यह जान लेना जरूरी है कि इस पर उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित और मिश्रित (mixed) हैं — इसे एक स्थापित, सिद्ध इलाज नहीं माना जा सकता।

इसकी कोई मानक (standardized) खुराक भी तय नहीं है, इसलिए इसे घरेलू नुस्खे के तौर पर मनमाने ढंग से लेना जोखिम भरा हो सकता है — खासकर अगर आप कोई दवा ले रहे हैं, गर्भवती हैं, या बच्चों को देना चाहते हैं। किसी भी अर्क या सप्लीमेंट को आजमाने से पहले डॉक्टर से बात करना जरूरी है, और यह किसी भी हाल में डॉक्टर की निगरानी या इलाज का विकल्प नहीं बन सकता।

8. शराब और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ाने वाली आदतों से बचें

ज्यादा शराब का सेवन अस्थि मज्जा की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकता है और रिकवरी को धीमा कर सकता है। हालांकि यह कहना ठीक नहीं होगा कि सामान्य खान-पान की चीजें सीधे प्लेटलेट्स को "नष्ट" करती हैं — जिम्मेदार जीवनशैली अपनाना समझदारी है, डर से नहीं बल्कि संतुलन से।

9. डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं या सप्लीमेंट्स न लें

एस्पिरिन, आइबुप्रोफेन जैसी NSAIDs दवाएं खून को पतला कर सकती हैं और ब्लीडिंग का खतरा बढ़ा सकती हैं — डेंगू या पहले से कम प्लेटलेट काउंट वाली स्थिति में इन्हें बिना डॉक्टर की सलाह के लेना ठीक नहीं। इसी तरह बाजार में मिलने वाले "प्लेटलेट बूस्टर" के नाम पर बिकने वाले सप्लीमेंट्स को बिना जांच-परख के शुरू न करें। अगर आप पहले से कोई दवा ले रहे हैं, तो उसे डॉक्टर की सलाह के बिना बंद भी न करें।

10. अगर प्लेटलेट्स बहुत कम हैं या ब्लीडिंग हो रही है, तो घरेलू उपायों पर निर्भर न रहें

हल्की कमी में ऊपर बताए गए तरीके सहायक हो सकते हैं, लेकिन गंभीर लक्षण या बहुत कम काउंट होने पर मेडिकल मूल्यांकन जरूरी हो जाता है। कारण के आधार पर डॉक्टर अंतर्निहित बीमारी का इलाज कर सकते हैं, और कुछ चुनिंदा गंभीर मामलों में अस्पताल में प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन या अन्य उपचार की जरूरत पड़ सकती है — यह फैसला पूरी तरह डॉक्टर की जांच पर निर्भर करता है।

प्लेटलेट्स कम होने पर क्या खाएं?

खाद्य पदार्थ मुख्य पोषक तत्व यह रिकवरी में कैसे मदद करता है
पपीता विटामिन सी, फाइबर पाचन और सामान्य पोषण में सहायक
अमरूद, आंवला, संतरा विटामिन सी एंटीऑक्सीडेंट सपोर्ट देता है
कीवी विटामिन सी और के ओवरऑल इम्यून सपोर्ट
अनार आयरन, एंटीऑक्सीडेंट पोषण और ऊर्जा में सहायक
पालक और अन्य हरी सब्जियां फोलेट, विटामिन K ब्लड सेल निर्माण में सहायक
दालें और चने प्रोटीन, फोलेट, आयरन शरीर की मरम्मत प्रक्रिया को सपोर्ट करता है
अंडे प्रोटीन, विटामिन B12 रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायक
दूध और दही कैल्शियम, विटामिन D समग्र पोषण को सपोर्ट करता है
मछली प्रोटीन, विटामिन B12 अस्थि मज्जा के कार्य में सहायक पोषण
मेवे और बीज स्वस्थ वसा, मिनरल्स सूजन कम करने में मददगार

ध्यान दें: इनमें से कोई भी खाद्य पदार्थ "गारंटीड प्लेटलेट बूस्टर" नहीं है — ये सभी संतुलित आहार का हिस्सा हैं जो शरीर को रिकवर करने में मदद करता है।

प्लेटलेट्स कम होने पर क्या न खाएं?

  • शराब का सेवन
  • इंफेक्शन के दौरान बाहर का कच्चा या अस्वच्छ खाना
  • ज्यादा मात्रा में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और तला-भुना खाना
  • बिना जरूरत के "प्लेटलेट बूस्टर" बताकर बिकने वाले सप्लीमेंट्स
  • डॉक्टर की सलाह के बिना ब्लीडिंग का खतरा बढ़ाने वाली दवाएं

डेंगू में प्लेटलेट्स कैसे बढ़ाएं?

डेंगू में प्लेटलेट काउंट का गिरना बीमारी के सामान्य पैटर्न का हिस्सा है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सिर्फ नंबर देखकर बीमारी की गंभीरता तय की जा सकती है — डॉक्टर लक्षण, हाइड्रेशन स्तर, ब्लड प्रेशर और अन्य जांचों को मिलाकर स्थिति का आकलन करते हैं।

इस दौरान सबसे ज्यादा मदद करती हैं ये चीजें: पर्याप्त आराम, शरीर में पानी की कमी न होने देना, और नियमित ब्लड टेस्ट के जरिए डॉक्टर की निगरानी में रहना। कोई भी खाना अकेले डेंगू को कंट्रोल नहीं कर सकता।

क्या डेंगू में पपीते के पत्ते का रस लेना चाहिए? इस पर शोध जारी है और कुछ अध्ययनों में सकारात्मक संकेत मिले हैं, लेकिन प्रमाण अभी इतने मजबूत नहीं हैं कि इसे मानक इलाज माना जाए। अगर आप इसे आजमाना चाहते हैं, तो यह डॉक्टर की सलाह और निगरानी के साथ ही करें, अकेले इस पर निर्भर होकर मेडिकल इलाज न छोड़ें।

प्लेटलेट्स बढ़ाने को लेकर 7 आम मिथक और सच्चाई

मिथक 1: पपीते का पत्ता 2 दिन में प्लेटलेट्स ठीक कर देता है।
सच्चाई: इसे गारंटीड तेज इलाज मानने लायक ठोस प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं हैं।

मिथक 2: हर कम प्लेटलेट काउंट डेंगू की वजह से होता है।
सच्चाई: इंफेक्शन, दवाएं, पोषण की कमी और कई अन्य वजहें भी इसके पीछे हो सकती हैं।

मिथक 3: प्लेटलेट्स कम आते ही ट्रांसफ्यूजन जरूरी हो जाता है।
सच्चाई: यह पूरी तरह लक्षण, ब्लीडिंग और कारण पर निर्भर करता है — हर कम काउंट में ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती।

मिथक 4: केला केवल खाने से प्लेटलेट्स दोगुने हो जाते हैं।
सच्चाई: कोई भी एक फल अकेले इतना तेज असर नहीं करता; संतुलित आहार ज्यादा मायने रखता है।

मिथक 5: प्लेटलेट काउंट सामान्य होते ही बीमारी पूरी तरह ठीक मानी जा सकती है।
सच्चाई: डॉक्टर की सलाह के अनुसार फॉलो-अप जरूरी है, क्योंकि रिकवरी की पूरी तस्वीर सिर्फ एक नंबर से नहीं बनती।

मिथक 6: सप्लीमेंट्स लेने से आहार की कमी पूरी हो जाती है।
सच्चाई: सप्लीमेंट्स संतुलित आहार का विकल्प नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह पर उसका पूरक हो सकते हैं।

मिथक 7: हल्की कमी में भी दवा लेना जरूरी है।
सच्चाई: कई बार हल्की कमी बिना दवा के, कारण ठीक होने के साथ अपने-आप सुधर जाती है — फैसला डॉक्टर पर छोड़ें।

प्लेटलेट्स कम हों तो डॉक्टर से तुरंत कब मिलें?

अगर नीचे दिए गए संकेतों में से कोई भी दिखे, तो घरेलू उपायों पर भरोसा किए बिना तुरंत मेडिकल मदद लें:

  • बिना रुके ब्लीडिंग होना
  • उल्टी में खून आना
  • मल या पेशाब में खून आना, या मल का काला रंग होना
  • बार-बार नाक या मसूड़ों से खून आना
  • पेट में तेज दर्द
  • लगातार उल्टी होना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बेहोशी या भ्रम की स्थिति (confusion)
  • तेजी से बढ़ती कमजोरी
  • डॉक्टर द्वारा जांचा गया बेहद कम प्लेटलेट काउंट
  • गर्भावस्था के दौरान कम प्लेटलेट्स के साथ सूजन या हाई ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण

प्लेटलेट्स कम होने पर कौन-कौन से टेस्ट किए जा सकते हैं?

कारण जानने के लिए डॉक्टर आमतौर पर इनमें से जरूरी जांचें सुझा सकते हैं:

  • CBC (Complete Blood Count)
  • दोबारा प्लेटलेट काउंट जांच, पुष्टि के लिए
  • पेरिफेरल स्मीयर (Peripheral Smear)
  • डेंगू टेस्ट, जहां क्लिनिकली जरूरी हो
  • लीवर और किडनी फंक्शन टेस्ट
  • विटामिन B12 और फोलेट की जांच
  • मरीज की हिस्ट्री के हिसाब से अन्य जांचें

हर मरीज के लिए एक जैसा टेस्ट पैकेज जरूरी नहीं — डॉक्टर लक्षणों के आधार पर तय करते हैं कि कौन सी जांच जरूरी है।

प्लेटलेट्स कम होने पर डॉक्टर से सलाह क्यों जरूरी है?

प्लेटलेट काउंट कम होने के पीछे इतनी अलग-अलग वजहें हो सकती हैं कि सही डायग्नोसिस के बिना सही इलाज तय करना मुश्किल है। एक जैसे लक्षण अलग-अलग कारणों से हो सकते हैं, और हर कारण का इलाज अलग होता है। इसलिए घरेलू उपाय आजमाने के साथ-साथ, खासकर अगर काउंट लगातार कम बना रहे या लक्षण बढ़ें, तो जल्द से जल्द किसी अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन या हीमेटोलॉजी विभाग में डॉक्टर से मिलना बेहतर विकल्प है।

ज्यादातर अस्पताल CBC जांच, विशेषज्ञ परामर्श और जरूरत पड़ने पर भर्ती की सुविधा उपलब्ध कराते हैं — अपनी नजदीकी सुविधा के अनुसार समय पर जांच करवाना सबसे अहम कदम है।

अगर आपका प्लेटलेट काउंट कम है या आपको डेंगू के लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो देर न करें। नोवा हॉस्पिटल, मेरठ में हमारी विशेषज्ञ टीम से मिलें और अपनी जांच व इलाज आज ही शुरू करें। अपॉइंटमेंट के लिए कॉल करें: 7055006662

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के लिए है, यह किसी डॉक्टर की सलाह या इलाज का विकल्प नहीं है। अपने लक्षणों और रिपोर्ट के अनुसार सही सलाह के लिए हमेशा एक योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।

Dr Dimpi Malik

Written and Verified by:

Dr Dimpi Malik

Ayurveda

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Frequently Asked Questions

कोई भी एक तरीका तुरंत असर नहीं करता। सबसे पहले कारण पता करना जरूरी है, फिर संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, आराम और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज लेने से रिकवरी में मदद मिलती है।

पपीता, कीवी, अमरूद और अनार जैसे फल पोषण की दृष्टि से फायदेमंद हैं, लेकिन कोई भी फल अकेले प्लेटलेट्स को गारंटीड तेजी से नहीं बढ़ाता।

कुछ शोध इसके संभावित फायदे की ओर इशारा करते हैं, खासकर डेंगू में, लेकिन प्रमाण अभी सीमित हैं। इसे डॉक्टर की सलाह के बिना मुख्य इलाज न मानें।
अनार पोषण और एंटीऑक्सीडेंट के लिहाज से अच्छा है, लेकिन इसे सीधा "प्लेटलेट बूस्टर" कहना सही नहीं होगा।
आराम, पर्याप्त पानी और डॉक्टर की नियमित निगरानी सबसे जरूरी हैं। कोई भी खाना अकेले डेंगू को कंट्रोल नहीं कर सकता।
सामान्य रेंज 1,50,000 से 4,50,000 प्रति माइक्रोलीटर मानी जाती है, लेकिन सटीक व्याख्या डॉक्टर लक्षणों के आधार पर करते हैं।
50,000 से नीचे जाने पर ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है, लेकिन खतरे का सही आकलन लक्षण, कारण और मेडिकल जांच से ही होता है — सिर्फ नंबर से नहीं।
कुछ मामलों में सुधार तेज हो सकता है, लेकिन यह व्यक्ति, कारण और इलाज पर निर्भर करता है — इसे किसी तय समय सीमा में गारंटी के तौर पर नहीं देखा जा सकता।
शराब, अस्वच्छ खाना, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड और बिना डॉक्टर की सलाह के ब्लीडिंग बढ़ाने वाली दवाओं से बचना चाहिए।
बार-बार नील पड़ना, नाक-मसूड़ों से खून आना, त्वचा पर लाल-बैंगनी धब्बे, ज्यादा देर तक ब्लीडिंग होना और असामान्य कमजोरी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
CBC सबसे बुनियादी जांच है। जरूरत पड़ने पर पेरिफेरल स्मीयर, डेंगू टेस्ट, लीवर फंक्शन और B12/फोलेट की जांच भी की जा सकती है।
नहीं। इंफेक्शन, दवाओं का असर, पोषण की कमी, इम्यून संबंधी स्थितियां और बोन मैरो विकार भी इसकी वजह हो सकते हैं।